शनिवार, 25 जनवरी 2025

BCOC 136 assignment in hindi,BcomG 2nd year IGNOU

 BCOC 136 assignment in hindi,BcomG 2nd year IGNOU 


Bcoc 136
BcomG, assignment 



1. आकस्मिक आय से आप क्या समझते हैं? आयकर कानून के अंतर्गत प्रावधानों का वर्णन कीजिए ।

अक्षमिक आय

अक्षमिक आय वह आय होती है जो किसी विशेष घटना या अनियमित स्त्रोत से उत्पन्न होती है और नियमित आय का हिस्सा नहीं होती। इसे आमतौर पर असाधारण या आकस्मिक आय भी कहा जाता है। इसका मुख्य उदाहरण लॉटरी जीतना, पुरस्कार प्राप्त करना, एकमुश्त बोनस, या किसी अनपेक्षित स्रोत से धन का प्राप्त होना है। यह ऐसी आय है जो व्यक्ति को बार-बार नहीं मिलती, बल्कि एक विशेष परिस्थिति में ही उत्पन्न होती है। अक्षमिक आय के कई रूप हो सकते हैं, जैसे लॉटरी, घुड़दौड़, टी.वी. गेम शो या प्रतियोगिता से प्राप्त धनराशि। यह आय व्यक्ति की मूल आय से भिन्न होती है क्योंकि इसका नियमित रूप से उत्पन्न होने की संभावना नहीं होती।

आयकर कानून में अक्षमिक आय का महत्व

भारत में आयकर कानून के अंतर्गत अक्षमिक आय पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस तरह की आय पर कर का प्रावधान है ताकि आय के किसी भी प्रकार को कराधान से बाहर न रखा जाए। आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार, अक्षमिक आय पर आयकर लागू होता है, और इसका कर निर्धारण नियमित आय से अलग होता है। इस प्रकार की आय पर अधिक दर से कर लगाया जाता है क्योंकि इसे एक असाधारण लाभ माना जाता है, और इस पर कर की दरें सामान्य आय से अधिक होती हैं। उदाहरणस्वरूप, लॉटरी से प्राप्त धन पर 30% की दर से कर लगाया जाता है, साथ ही शेष अधिभार और उपकर भी लागू होते हैं।

इसके अलावा, आयकर अधिनियम की धारा 115BB के तहत, अक्षमिक आय को एक विशेष श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है ताकि इस प्रकार की आय पर स्पष्ट कराधान हो सके। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी असाधारण आय कराधान से मुक्त न रहे और सरकार को इससे राजस्व प्राप्त हो सके।

2. श्री विकास को 4,000 रु. पेंशन मिल रही है। पिछले वर्ष, उन्होंने दो-तिहाई पेंशन एकमुश्त करवाई और रु. 1,86,000 प्राप्त किए, पेंशन की कर मुक्त राशि की गणना कीजिए, कर निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए यदि (क) उसे ग्रेच्युटी भी प्राप्त हुई (ख) उसे ग्रेच्युटी प्राप्त नहीं है।


पेंशन की कर मुक्त राशि की गणना के लिए, दो स्थितियाँ हैं: (क) जब ग्रेच्युटी प्राप्त हुई हो और (ख) जब ग्रेच्युटी प्राप्त नहीं हुई हो। हम दोनों स्थितियों के लिए अलग-अलग गणना करेंगे:

(क) जब श्री विकास को ग्रेच्युटी प्राप्त हुई हो:

नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को ग्रेच्युटी प्राप्त हुई हो, तो एकमुश्त पेंशन की कर मुक्त राशि निम्न में से कम होती है:

1. एकमुश्त पेंशन का एक-तिहाई (1/3)


2. रु. 1,00,000




श्री विकास ने 1,86,000 रुपये एकमुश्त प्राप्त किए हैं।

1. एक-तिहाई (1/3) पेंशन:



1,86,000 \times \frac{1}{3} = 62,000 \text{ रुपये}

इसलिए, कर मुक्त राशि 62,000 रुपये होगी, क्योंकि यह 1,00,000 रुपये से कम है।

(ख) जब श्री विकास को ग्रेच्युटी प्राप्त नहीं हुई हो:

यदि ग्रेच्युटी प्राप्त नहीं हुई हो, तो एकमुश्त पेंशन की कर मुक्त राशि निम्न में से कम होती है:

1. एकमुश्त पेंशन का आधा (1/2)


2. रु. 1,00,000




1. आधा (1/2) पेंशन:



1,86,000 \times \frac{1}{2} = 93,000 \text{ रुपये}

इसलिए, कर मुक्त राशि 93,000 रुपये होगी, क्योंकि यह 1,00,000 रुपये से कम है।

निष्कर्ष:

(क) ग्रेच्युटी प्राप्त होने पर कर मुक्त राशि = 62,000 रुपये।

(ख) ग्रेच्युटी प्राप्त न होने पर कर मुक्त राशि = 93,000 रुपये।


3.
गत वर्ष 2021-22 के लिए एक्स लिमिटेड के परिवार नियोजन के व्ययों की स्वीकृति के पहले की आय रु. 3,00,000 है कम्पनी ने गत वर्ष 2021 22 में परिवार नियोजन पर कर्मचारियों के ऊपर निम्न व्यय किए।

1) परिवार नियोजन पर आयगत व्यय 1,65,000

2) परिवार नियोजन पर पूंजीगत व्यय

क) कंपनी के परिवार नियोजन के व्यय की कटौती की गणना यह मानकर कीजिए कि कंपनी की अन्य स्रोतों से आय रु. 30,000 थी।

ख) आपका उत्तर क्या होगा यदि परिवार नियोजन के आयगत व्यय रु. 1,65,000 के स्थान पर रु. 2,30,000 है।


इस प्रश्न में, हमें कंपनी के परिवार नियोजन के व्ययों के लिए आयकर अधिनियम के अनुसार कटौती की गणना करनी है। दो हिस्सों में विभाजित जानकारी दी गई है:

1. परिवार नियोजन पर आयगत व्यय


2. परिवार नियोजन पर पूंजीगत व्यय



(क) परिवार नियोजन के व्यय की कटौती की गणना (आयगत व्यय रु. 1,65,000):

1. आयगत व्यय की कटौती:

आयकर अधिनियम के अनुसार, कंपनी को परिवार नियोजन पर किए गए आयगत व्यय की पूरी कटौती मिलती है।

आयगत व्यय = रु. 1,65,000

इसलिए, इस व्यय की पूरी कटौती मिलेगी = रु. 1,65,000


2. पूंजीगत व्यय की कटौती:

परिवार नियोजन पर किए गए पूंजीगत व्यय की कटौती के लिए, कंपनी को कुल पूंजीगत व्यय का 1/5 हिस्सा (5 वर्षों में) प्रत्येक वर्ष के लिए काटने की अनुमति होती है।

अगर हमें पूंजीगत व्यय का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया गया है, तो हम मान सकते हैं कि यह कटौती इस साल के लिए लागू नहीं है।

3. अन्य स्रोतों से आय:

कंपनी की अन्य स्रोतों से आय = रु. 30,000


कुल आय की गणना:

स्वीकृति के पहले की आय = रु. 3,00,000 (ध्यान दें, यहाँ आय नकारात्मक है, इसलिए यह घाटा दिखाता है)

परिवार नियोजन पर आयगत व्यय की कटौती = रु. 1,65,000

अन्य स्रोतों से आय = रु. 30,000


कुल आय (ध्यान दें कि स्वीकृति के पहले की आय घाटे में है):

(3,00,000) + 30,000 = (2,70,000)

(2,70,000) - 1,65,000 = (4,35,000)


---

(ख) यदि आयगत व्यय रु. 2,30,000 हो:

1. आयगत व्यय की कटौती:

आयगत व्यय = रु. 2,30,000

इस व्यय की पूरी कटौती मिलेगी = रु. 2,30,000


2. पूंजीगत व्यय की कटौती:

जैसा कि पहले बताया गया है, पूंजीगत व्यय की कटौती का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया गया है, इसलिए इसे नजरअंदाज किया जा सकता है।

3. अन्य स्रोतों से आय:

अन्य स्रोतों से आय = रु. 30,000


कुल आय की गणना:

स्वीकृति के पहले की आय = रु. (10) 3,00,000 (घाटा)

परिवार नियोजन पर आयगत व्यय की कटौती = रु. 2,30,000

अन्य स्रोतों से आय = रु. 30,000


कुल आय:

(3,00,000) + 30,000 = (2,70,000)

(2,70,000) - 2,30,000 = (5,00,000)


---

निष्कर्ष:

(क) यदि परिवार नियोजन का आयगत व्यय रु. 1,65,000 है, तो कंपनी की कुल आय = (4,35,000) घाटा।

(ख) यदि परिवार नियोजन का आयगत व्यय रु. 2,30,000 है, तो कंपनी की कुल आय = (5,00,000) घाटा।

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4.
श्रीमती सुमन गर्ग द्वारा आय का निम्नलिखित विचरण कर निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए प्रस्तुत किया

गया है। वह दिल्ली में रहती है. ।) मूल वेतन 10,000 प्रतिमाह। ii) महंगाई भत्ता वेतन का 10% iii) मकान किराया भत्ता मूल वेतन का 30% iv) चिकित्सा भत्ता 200 रुपये प्रति माह। (अपने उपचार के लिए वास्तव में 2000 खर्च किये) ४) वार्डन भत्ता रु. 400 प्रतिमाह। vi) मकान सम्पत्ति से किराया रु.

3,000 प्रति माह vii) प्रमाणित प्रोविडेंट फण्ड में अंशदान, मूल वेतन का 10% viii) मकान किराया भुगतान 6,000 रु प्रति माह ix) अनुमोदित पुण्यार्थ संस्था को रु. 20,000 का दान। कर निर्धारण वर्ष

2022-23 के लिए आय की गणना कीजिए।


श्रीमती सुमन गर्ग द्वारा प्रस्तुत आय का निर्धारण कर निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए इस प्रकार किया जाएगा:

1. वेतन से आय:

मूल वेतन: ₹10,000 प्रतिमाह
वार्षिक: ₹10,000 × 12 = ₹1,20,000

महंगाई भत्ता: 10% × ₹1,20,000 = ₹12,000

मकान किराया भत्ता (HRA): 30% × ₹1,20,000 = ₹36,000
HRA की छूट की गणना इस प्रकार होगी:

प्राप्त HRA: ₹36,000

किराया भुगतान किया: ₹72,000 (₹6,000 × 12)
(किराया भुगतान – 10% वेतन): ₹72,000 - ₹12,000 = ₹60,000

नगर की 50% छूट: ₹60,000
तो HRA छूट होगी ₹36,000 और यह आय में जुड़ने योग्य नहीं होगी।


HRA छूट: ₹36,000, तो इसे आय में नहीं जोड़ा जाएगा।

चिकित्सा भत्ता: ₹200 × 12 = ₹2,400
चिकित्सा व्यय ₹2,000 किया गया, परंतु आयकर कानून के अनुसार ₹15,000 तक चिकित्सा भत्ता कर-मुक्त होता है। इस स्थिति में ₹2,400 पूरा कर-मुक्त होगा।

वार्डन भत्ता: ₹400 × 12 = ₹4,800
(यह पूर्ण रूप से कर योग्य है)


2. संपत्ति से आय:

मकान से किराया आय: ₹3,000 × 12 = ₹36,000
(30% छूट के बाद आय): ₹36,000 – 30% = ₹25,200


3. प्रोविडेंट फंड में योगदान:

प्रोविडेंट फंड में अंशदान: ₹1,20,000 × 10% = ₹12,000
(80C के अंतर्गत छूट)


4. पुण्यार्थ दान:

अनुमोदित पुण्यार्थ संस्था को दान: ₹20,000
(80G के अंतर्गत 50% छूट: ₹10,000)


आय की कुल गणना:

कुल आय: ₹1,32,000 + ₹4,800 + ₹25,200 - ₹12,000 - ₹10,000 = ₹1,40,000

अतः श्रीमती सुमन गर्ग की कर योग्य आय निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए ₹1,40,000 होगी।

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5.
विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों पर चर्चा करें? करमुक्त व्यापारिक प्रतिमूर्ति को सकल बनाये रखने के नियमों को समझाए।


विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियाँ (Securities):

1. इक्विटी शेयर (Equity Shares):

इसे सामान्य शेयर भी कहा जाता है। यह कंपनी के स्वामित्व में अंश प्रदान करते हैं और इनके धारकों को कंपनी की लाभांश और शेयर की बढ़ती कीमत से फायदा होता है। जोखिम अधिक होता है, लेकिन संभावित रिटर्न भी उच्च होता है।


2. डिबेंचर (Debentures):

यह एक कर्ज होता है जो कंपनी द्वारा उधार लिया जाता है। डिबेंचर धारकों को नियमित ब्याज भुगतान प्राप्त होता है, लेकिन कंपनी के स्वामित्व में कोई हिस्सा नहीं होता। डिबेंचर अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले होते हैं क्योंकि इनमें स्थिर ब्याज दर होती है।


3. सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities):

यह केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी प्रतिभूतियाँ होती हैं, जैसे कि ट्रेजरी बिल और बांड। यह निवेश सुरक्षित होता है और इन्हें कर-मुक्त भी बनाया जा सकता है।


4. वरीयता शेयर (Preference Shares):

इन शेयरों के धारकों को पहले लाभांश मिलता है और कंपनी बंद होने पर उन्हें पहले भुगतान किया जाता है। लेकिन इनमें वोटिंग अधिकार सामान्यतः नहीं होते हैं।


5. म्युचुअल फंड (Mutual Funds):

इसमें कई निवेशकों के पैसे को इकट्ठा करके विभिन्न शेयरों, बांडों या अन्य प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है। यह एक विविधीकृत निवेश विकल्प है और कम जोखिम प्रदान करता है।


6. वायदा और विकल्प (Futures and Options):

यह वित्तीय साधन होते हैं जो भविष्य की कीमतों पर आधारित होते हैं। यह मुख्य रूप से हेजिंग और सट्टेबाजी के लिए उपयोग किया जाता है।


7. बांड (Bonds):

यह एक प्रकार का कर्जपत्र होता है, जिसमें निवेशक को कंपनी या सरकार द्वारा एक निश्चित ब्याज दर पर भुगतान किया जाता है। इसे एक निश्चित अवधि के बाद निवेशक को वापस किया जाता है।


करमुक्त व्यापारिक प्रतिमूर्ति को सकल बनाये रखने के नियम 

करमुक्त व्यापारिक प्रतिमूर्ति के नियम उन व्यापारिक इकाइयों पर लागू होते हैं जो कर-मुक्त क्षेत्र में व्यापार करती हैं। इन नियमों का उद्देश्य है यह सुनिश्चित करना कि कर-मुक्त प्रतिमूर्ति का उपयोग केवल व्यापारिक उद्देश्यों के लिए हो और किसी प्रकार का कर चोरी या अनुचित लाभ न उठाया जा सके।

1. कर अनुपालन:

व्यापारिक इकाइयों को सभी संबंधित कर नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, भले ही उनकी आय कर-मुक्त हो।


2. प्रमाणित आय:

व्यापारिक इकाइयों को अपनी आय को प्रमाणित करना आवश्यक होता है, जो कर-मुक्त आय के दायरे में आती है।


3. अनुमोदित कर-मुक्त क्षेत्र:

केवल उन इकाइयों को कर-मुक्त प्रतिमूर्ति का लाभ मिलता है, जो सरकार द्वारा अनुमोदित कर-मुक्त क्षेत्रों में व्यापार करती हैं।


4. आय का सही लेखांकन:

व्यापारिक इकाइयों को अपनी आय का सही तरीके से लेखांकन करना होगा और सभी दस्तावेज सटीक होने चाहिए।


5. लाभांश वितरण:

कर-मुक्त आय से संबंधित लाभांश वितरण पर विशेष नियम लागू हो सकते हैं, जैसे कि लाभांश कर-मुक्त हो सकता है।


6. निवेश और पुनर्निवेश:

कर-मुक्त आय का पुनर्निवेश विशेष क्षेत्रों में किया जा सकता है और इसकी अनुमति दी जा सकती है यदि वह उत्पादकता में वृद्धि करता है।


7. व्यय पर नियंत्रण:

व्यापारिक इकाइयों को अपने व्यय का लेखा-जोखा सही रखना होगा, ताकि कर-मुक्त लाभ का उपयोग अनावश्यक कार्यों के लिए न हो।


8. निरीक्षण और लेखा परीक्षा:

व्यापारिक इकाइयों को समय-समय पर निरीक्षण और लेखा परीक्षा के लिए तैयार रहना होगा ताकि कर-मुक्त प्रतिमूर्ति का दुरुपयोग न हो।


9. अपारदर्शिता की रोकथाम:

व्यापारिक इकाइयों को अपनी वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक होता है।


10. सरकारी निगरानी:

सरकार या नियामक प्राधिकरण समय-समय पर कर-मुक्त व्यापारिक इकाइयों की जांच कर सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कर-मुक्त प्रतिमूर्ति का सही उपयोग हो रहा है।


6.
किसी व्यक्ति को निवासी लेकिन मामूली तौर पर निवासी नहीं निर्धारित करने की प्रक्रिया समझाइए

"निवासी लेकिन मामूली तौर पर निवासी नहीं" की अवधारणा भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत आती है। इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि एक व्यक्ति किस प्रकार की कर स्थिति में आता है। इसे समझने के लिए, निम्नलिखित प्रक्रिया को ध्यान में रखा जाता है:

1. सामान्य निवासी और अनिवासी की परिभाषा:

निवासी (Resident): एक व्यक्ति को "निवासी" माना जाता है यदि वह भारत में किसी भी वित्तीय वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक समय के लिए उपस्थित रहा हो। इसके अलावा, कुछ विशेष स्थितियों के तहत, यदि व्यक्ति पिछले चार वर्षों में 365 दिन या उससे अधिक समय तक भारत में रहा है और वह पिछले वित्तीय वर्ष में 60 दिनों या उससे अधिक के लिए भारत में उपस्थित रहा हो, तो उसे भी "निवासी" माना जाएगा।

अनिवासी (Non-Resident): यदि कोई व्यक्ति उपर्युक्त शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो उसे "अनिवासी" माना जाएगा।


2. मामूली तौर पर निवासी नहीं (Not Ordinarily Resident):

यदि कोई व्यक्ति भारत में "निवासी" के रूप में अर्हता प्राप्त कर लेता है, तो यह भी जाँच की जाती है कि वह "मामूली तौर पर निवासी नहीं" की श्रेणी में आता है या नहीं। इसका मतलब है कि व्यक्ति भले ही "निवासी" हो, लेकिन उसे "मामूली तौर पर निवासी नहीं" के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इसे समझने के लिए निम्नलिखित शर्तें देखी जाती हैं:


3. मामूली तौर पर निवासी नहीं की शर्तें:

कोई व्यक्ति "निवासी लेकिन मामूली तौर पर निवासी नहीं" तब कहलाता है, जब वह:

1. पिछले 10 वर्षों में से 9 वर्षों के लिए भारत में "निवासी" न रहा हो; या


2. पिछले 7 वर्षों के दौरान 729 दिनों से कम समय के लिए भारत में उपस्थित रहा हो।



यदि व्यक्ति इन दोनों शर्तों में से कोई एक शर्त पूरी करता है, तो उसे "निवासी लेकिन मामूली तौर पर निवासी नहीं" की श्रेणी में रखा जाता है।

4. कराधान का प्रभाव:

मामूली तौर पर निवासी नहीं व्यक्ति को भारत में केवल उन्हीं आयों पर कर देना होगा, जो भारत में उत्पन्न होती हैं या भारत में अर्जित होती हैं। अंतर्राष्ट्रीय आय (जो भारत के बाहर अर्जित होती है) पर उसे कर नहीं देना होता।

इसका मुख्य लाभ यह है कि भारतीय निवासी होते हुए भी विदेशी आय पर कराधान से बचाव किया जा सकता है, जब तक कि वह भारत में प्राप्त न हो या भारत से संबंधित न हो।


5. उदाहरण:

यदि कोई भारतीय मूल का व्यक्ति विदेश में काम करता है और वर्ष के अधिकांश समय विदेश में बिताता है, लेकिन भारत में कुछ समय के लिए आता है और 182 दिन की उपस्थिति की शर्त पूरी करता है, तो उसे "निवासी" माना जाएगा। लेकिन यदि वह पिछले 10 वर्षों में से 9 वर्षों में भारत का निवासी नहीं रहा हो, तो उसे "मामूली तौर पर निवासी नहीं" माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उसकी विदेशी आय पर भारत में कर नहीं लगेगा।

निष्कर्ष:

"निवासी लेकिन मामूली तौर पर निवासी नहीं" की प्रक्रिया आयकर अधिनियम में उन व्यक्तियों के लिए एक विशेष स्थिति है, जो नियमित रूप से भारत में नहीं रहते हैं, लेकिन एक वित्तीय वर्ष में भारत में अधिक समय बिता सकते हैं। इसका लाभ यह है कि ऐसे व्यक्तियों को अपनी विदेशी आय पर भारत में कर का भुगतान नहीं करना पड़ता।


7.
दिखावटी लेनदेन के माध्यम से कर से कैसे बचा जाता है?
दिखावटी लेनदेन (Sham Transactions) का उपयोग कर बचाव (Tax Evasion) के लिए किया जाता है। यह वह लेनदेन होते हैं जो केवल कागजी या कानूनी रूप से किए जाते हैं, लेकिन इनका वास्तविकता में कोई आर्थिक या व्यावसायिक उद्देश्य नहीं होता। ऐसे लेनदेन का एकमात्र उद्देश्य कर से बचाव करना होता है। कर बचाव के लिए दिखावटी लेनदेन के उपयोग को गैरकानूनी माना जाता है और यदि इसका पता चल जाता है तो गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

दिखावटी लेनदेन के माध्यम से कर बचाव की प्रक्रिया:

1. नकली लेनदेन (Fake Transactions):

लोग कागजों पर लेनदेन को दिखाते हैं जो वास्तव में हुआ ही नहीं है। यह दिखाया जाता है कि किसी संपत्ति या सेवा का आदान-प्रदान हुआ है, लेकिन असल में कुछ भी नहीं हुआ। इसका उद्देश्य कर योग्य आय को कम दिखाना होता है।


2. बेनामी संपत्ति (Benami Transactions):

बेनामी लेनदेन में व्यक्ति अपनी संपत्ति या धन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर रखता है। इस तरह से संपत्ति का वास्तविक स्वामी कर से बच सकता है क्योंकि वह आय को अपने नाम पर नहीं दिखाता है।


3. फर्जी व्यय (False Expenses):

फर्जी खर्चे दिखाकर कर बचाने की कोशिश की जाती है। लोग अपने खाते में ऐसे खर्चों को दर्ज कर लेते हैं जो असल में हुए ही नहीं होते, ताकि आय को कम दिखाया जा सके और उस पर कम कर लगे।


4. संपत्ति का कृत्रिम हस्तांतरण (Artificial Transfer of Assets):

व्यक्ति अपनी संपत्ति को कम कर वाले क्षेत्रों या अन्य लोगों के नाम पर कृत्रिम रूप से स्थानांतरित करता है, ताकि कर से बचा जा सके। इसका उद्देश्य आय को कम कर के दायरे से बाहर निकालना होता है।


5. हानिप्रद कंपनियों का उपयोग (Use of Loss-Making Companies):

करदाताओं द्वारा ऐसी कंपनियों में निवेश किया जाता है, जो नुकसान में हैं, ताकि उनका लाभांश या आय कम दिखाया जा सके। यह लेनदेन केवल कर बचाव के लिए होते हैं और इनमें वास्तविक व्यावसायिक लाभ का कोई उद्देश्य नहीं होता।


6. आय का पुनर्वर्गीकरण (Reclassification of Income):

आय को कम कर योग्य स्रोत में बदलने का प्रयास किया जाता है। उदाहरण के लिए, लाभांश आय को ब्याज या ऋण के रूप में दिखाना, ताकि उस पर कम कर लगे।


7. फर्जी ऋण (Bogus Loans):

व्यक्ति कागजों पर बड़े ऋण दिखाकर कर बचाने की कोशिश करता है। इससे वह अपनी कर योग्य आय को कम कर सकता है क्योंकि ऋण को आय के रूप में नहीं दिखाया जाता।


8. ट्रस्टों और फाउंडेशन का दुरुपयोग (Misuse of Trusts and Foundations):

व्यक्ति अपनी आय या संपत्ति को ट्रस्ट या फाउंडेशन में डालकर उस पर कर बचाने की कोशिश करता है। इसका उद्देश्य संपत्ति को अपने व्यक्तिगत नाम से हटाकर कर से बचाव करना होता है।


दिखावटी लेनदेन से कर बचाव के कानूनी परिणाम:

1. कर दंड (Tax Penalties):

यदि कर विभाग को दिखावटी लेनदेन का पता चलता है, तो उस पर भारी दंड और ब्याज लगाया जा सकता है। व्यक्ति को कर के साथ-साथ अतिरिक्त जुर्माने का भी भुगतान करना पड़ सकता है।



2. कानूनी कार्रवाई (Legal Action):

दिखावटी लेनदेन को आयकर कानून के तहत धोखाधड़ी माना जाता है, और इसके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें गिरफ्तारी या संपत्ति की जब्ती भी शामिल हो सकती है।



3. संपत्ति की जब्ती (Seizure of Assets):

यदि बेनामी संपत्ति या फर्जी लेनदेन पाए जाते हैं, तो सरकार उन संपत्तियों को जब्त कर सकती है।




निष्कर्ष:

दिखावटी लेनदेन का उपयोग कर बचाने के लिए अवैध होता है और इसका उद्देश्य केवल कागजी तौर पर आय या संपत्ति को छिपाना होता है। यह कर कानूनों के विरुद्ध होता है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसलिए, कर नियोजन और कर बचाव के लिए कानूनी तरीकों का ही उपयोग करना चाहिए और दिखावटी लेनदेन से बचना चाहिए।

8.
मकान संपत्ति से आय की गणना में वार्षिक मूल्य को परिभाषित करें और उन कटौतियों का उल्लेख करें जो वार्षिक मूल्य से स्वीकार्य है।

मकान संपत्ति से आय की गणना में "वार्षिक मूल्य" (Annual Value) उस राशि को संदर्भित करता है, जिसे एक संपत्ति से किराए के रूप में कमाया जा सकता है या संपत्ति के स्वामी द्वारा उस संपत्ति का स्व-उपयोग न किए जाने पर संभावित रूप से कमाई जा सकती है। इसे भारत के आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 23 के तहत परिभाषित किया गया है।

वार्षिक मूल्य की परिभाषा:

1. वास्तविक किराया (Actual Rent Received):

यदि संपत्ति किराए पर दी गई है, तो उससे प्राप्त वास्तविक किराया "वार्षिक मूल्य" का आधार बनता है।


2. संभावित किराया (Fair Rental Value):

यदि संपत्ति किराए पर नहीं है, तो उस संपत्ति से मिलने वाला संभावित किराया, जिसे समान प्रकार की संपत्तियाँ उसी क्षेत्र में कमा सकती हैं, को वार्षिक मूल्य माना जाता है।


3. मानक किराया (Standard Rent):

यदि संपत्ति किसी किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत आती है, तो मानक किराया वह अधिकतम किराया है जिसे उस अधिनियम के तहत स्वीकृत किया जाता है। इसे वार्षिक मूल्य का आधार माना जाएगा, भले ही वास्तविक किराया इससे अधिक हो।


4. स्व-उपयोग वाली संपत्ति (Self-Occupied Property):

स्व-उपयोग वाली संपत्ति के लिए वार्षिक मूल्य "शून्य" माना जाता है, अर्थात स्व-उपयोग की गई संपत्ति से कोई आय नहीं मानी जाती है।


वार्षिक मूल्य की गणना:

वार्षिक मूल्य की गणना करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाता है:

उच्चतम मूल्य: वार्षिक मूल्य के लिए संभावित किराया, वास्तविक किराया, और मानक किराया का तुलना की जाती है, और इनमें से जो कम है, उसे वार्षिक मूल्य माना जाता है।


वार्षिक मूल्य से स्वीकार्य कटौतियाँ:

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 24 के तहत, वार्षिक मूल्य से निम्नलिखित कटौतियाँ स्वीकार्य हैं:

1. 30% की मानक कटौती (Standard Deduction):

वार्षिक मूल्य से 30% की मानक कटौती की जाती है। यह कटौती किसी भी प्रकार के खर्चों के आधार पर नहीं होती, बल्कि यह एक निश्चित कटौती होती है जो किसी भी प्रकार के मरम्मत, रखरखाव, और अन्य खर्चों को ध्यान में रखते हुए दी जाती है।

उदाहरण: यदि वार्षिक मूल्य ₹1,00,000 है, तो 30% की कटौती ₹30,000 होगी, और शेष ₹70,000 पर कर लगाया जाएगा।



2. गृह ऋण पर ब्याज की कटौती (Deduction for Interest on Home Loan):

यदि मकान संपत्ति को खरीदने, निर्माण करने, मरम्मत करने या पुनर्निर्माण करने के लिए ऋण लिया गया है, तो उस ऋण पर चुकाए गए ब्याज की कटौती की जा सकती है।

स्व-उपयोग वाली संपत्ति (Self-Occupied Property): ब्याज की अधिकतम सीमा ₹2,00,000 प्रति वर्ष है, यदि ऋण 1 अप्रैल, 1999 के बाद लिया गया है।

किराए पर दी गई संपत्ति (Let-Out Property): मकान को किराए पर देने की स्थिति में, ब्याज की कोई सीमा नहीं होती है, अर्थात पूरा ब्याज कटौती के लिए पात्र होता है, लेकिन एक विशेष संशोधन के बाद कुल कटौती ₹2,00,000 तक सीमित कर दी गई है।



3. पूर्व भुगतान की गई ब्याज की कटौती (Pre-construction Interest Deduction):

यदि संपत्ति का निर्माण ऋण के जरिए किया गया है और ब्याज का भुगतान निर्माण पूरा होने से पहले किया गया है, तो उस पूर्व भुगतान की गई ब्याज की राशि को अगले 5 वर्षों में समान किश्तों में काटा जा सकता है।




निष्कर्ष:

मकान संपत्ति से आय की गणना करते समय, वार्षिक मूल्य का निर्धारण किराया, संभावित किराया, और मानक किराया के आधार पर किया जाता है। आयकर अधिनियम, 1961 के तहत वार्षिक मूल्य से मानक कटौती (30%) और गृह ऋण पर ब्याज की कटौती जैसी कटौतियाँ दी जाती हैं, जो कर देयता को कम करने में मदद करती

9.
धारा 40 (b) के अंतर्गत फर्म की व्यापार एवं पेशे से आय की गणना में कौन सी मदे कटौती हेतु अमान्य है?

धारा 40(b) आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत साझेदारी फर्म की व्यापार या पेशे से होने वाली आय की गणना में कुछ विशेष प्रकार के भुगतान की कटौती को अमान्य माना जाता है। इस धारा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फर्म साझेदारों को किए गए असंगत या अनुचित भुगतान की कटौती का लाभ न उठा सके।

साझेदारों को वेतन, बोनस, कमीशन, या अन्य पारिश्रमिक के रूप में किए गए भुगतान की कटौती तभी मान्य होगी जब यह साझेदारी अनुबंध में स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट हो। यदि अनुबंध में इसका उल्लेख नहीं है, तो इस तरह के भुगतान की कटौती अमान्य होगी। इसके अलावा, अनुबंध में निर्दिष्ट राशि से अधिक भुगतान करने पर भी कटौती नहीं मिलेगी।

साथ ही, साझेदारों को दिए गए ब्याज की कटौती पर भी प्रतिबंध है। ब्याज का भुगतान तभी कटौती के योग्य होगा जब इसकी दर 12% प्रति वर्ष से अधिक न हो। यदि ब्याज दर 12% से अधिक है, तो अधिक दर से किए गए भुगतान की कटौती अमान्य होगी।

इस प्रकार, धारा 40(b) यह सुनिश्चित करती है कि फर्म द्वारा साझेदारों को किए गए भुगतान उचित और नियमानुसार हों, ताकि इनका दुरुपयोग कर आय में कटौती न की जा सके।


10.
आयकर रिटर्न दाखिल करने में देरी के परिणामों को संक्षेप में बताएं।

आयकर रिटर्न दाखिल करने में देरी के निम्नलिखित प्रमुख परिणाम होते हैं:

1. विलंब शुल्क: आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत, विलंब से रिटर्न दाखिल करने पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि आय ₹5 लाख से कम है, तो अधिकतम जुर्माना ₹1,000 है।


2. ब्याज का भुगतान: यदि करदाता पर कोई बकाया कर है, तो धारा 234A के तहत ब्याज (1% प्रति माह) भी देना पड़ता है।


3. धारा 80 के तहत कटौती का नुकसान: देरी से दाखिल किए गए रिटर्न पर धारा 80C, 80D आदि के तहत मिलने वाली कटौती का लाभ नहीं मिलेगा।


4. लॉस कैरी फॉरवर्ड का नुकसान: यदि करदाता को किसी वित्तीय वर्ष में नुकसान होता है, तो उसे अगले वर्षों में ले जाने और समायोजित करने की अनुमति नहीं होगी।


5. धारा 139(9) के तहत नोटिस: आयकर विभाग रिटर्न में त्रुटियों के लिए नोटिस भेज सकता है, जिससे परेशानी बढ़ सकती है।


6. रिफंड में देरी: यदि देरी से रिटर्न दाखिल किया जाता है, तो रिफंड प्राप्त करने में भी देरी हो सकती है।



11.
गत वर्ष की आय पर कर निर्धारण में कर लगाया जाता है"। व्याख्या करें।

"गत वर्ष की आय पर कर निर्धारण में कर लगाया जाता है" का अर्थ है कि आयकर का आकलन पिछले वित्तीय वर्ष (जिसे "आय वर्ष" कहा जाता है) की आय के आधार पर किया जाता है, लेकिन कर का भुगतान और कर रिटर्न दाखिल वर्तमान वर्ष (जिसे "निर्धारण वर्ष" कहा जाता है) में किया जाता है।

इसे समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं:

1. आय वर्ष (Previous Year):

आय वर्ष वह वर्ष होता है जिसमें व्यक्ति ने आय अर्जित की है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक आय अर्जित कर रहा है, तो यह अवधि 2022-23 का आय वर्ष कहलाएगी।



2. निर्धारण वर्ष (Assessment Year):

निर्धारण वर्ष वह वर्ष होता है जिसमें पिछले वर्ष की आय पर कर का आकलन किया जाता है और कर जमा किया जाता है।

उदाहरण के लिए, आय वर्ष 2022-23 के लिए निर्धारण वर्ष 2023-24 होगा। इसका मतलब है कि 2022-23 में अर्जित आय पर कर का भुगतान और रिटर्न दाखिल 2023-24 में किया जाएगा।



3. गत वर्ष की आय पर कर क्यों लगाया जाता है:

किसी भी करदाता की आय का सटीक आकलन तभी किया जा सकता है जब वह वर्ष पूरा हो चुका हो और उसकी कुल आय और खर्चों की जानकारी उपलब्ध हो।

इसीलिए, आय वर्ष समाप्त होने के बाद ही कर का आकलन किया जाता है, और निर्धारण वर्ष में करदाता से कर वसूला जाता है।



4. उदाहरण:

यदि एक व्यक्ति ने अप्रैल 2022 से मार्च 2023 (आय वर्ष 2022-23) में 5 लाख रुपये की आय अर्जित की, तो उसका कर निर्धारण 2023-24 (अप्रैल 2023 से मार्च 2024) में किया जाएगा।

इस प्रक्रिया के तहत व्यक्ति को 2023-24 में अपनी 2022-23 की आय का कर भरना होगा और उसी पर टैक्स रिटर्न दाखिल करना होगा।




निष्कर्ष:

यह प्रणाली इसलिए बनाई गई है ताकि सरकार के पास आय और कर का सटीक हिसाब हो, और करदाता को अपनी आय का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय मिले।

12.मकान किराया भत्ते की गणना के लिए क्या प्रावधान है?

मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance - HRA) आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कर-रहित (tax-exempt) हो सकता है यदि कोई व्यक्ति किराए के मकान में रह रहा है। HRA की गणना के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान हैं, जो निम्नलिखित हैं:

1. HRA पर कर छूट का प्रावधान:

आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) के अंतर्गत, किसी कर्मचारी को मिलने वाले मकान किराया भत्ता पर कर छूट मिल सकती है। यह छूट निम्नलिखित तीन मानदंडों के आधार पर न्यूनतम राशि के रूप में दी जाती है:

वास्तविक HRA प्राप्त किया गया (Actual HRA received): जो राशि कर्मचारी को नियोक्ता से HRA के रूप में मिलती है।

वेतन का 50% या 40%: कर्मचारी के वेतन का 50% (यदि वह मेट्रो शहर - दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, या चेन्नई में रहता है) या 40% (अन्य शहरों के लिए)।

किराए में वेतन का 10% घटा कर शेष राशि: किराए में से वेतन का 10% घटाने के बाद शेष राशि।


2. HRA छूट का गणना फार्मूला:

HRA छूट की गणना के लिए, ऊपर दिए गए तीनों मानदंडों में से जो राशि सबसे कम होती है, वही HRA पर कर-मुक्त राशि के रूप में मानी जाएगी।

3. वेतन की परिभाषा:

यहां वेतन का अर्थ है: बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता (DA) (यदि यह वेतन का हिस्सा हो) + कमीशन (यदि यह बिक्री पर आधारित है)। HRA छूट की गणना में अन्य भत्तों को शामिल नहीं किया जाता है।

4. उदाहरण:

मान लीजिए एक व्यक्ति मेट्रो सिटी में रहता है और उसकी निम्नलिखित आय है:

बेसिक सैलरी: 30,000 रुपये प्रति माह

महंगाई भत्ता (DA): 5,000 रुपये प्रति माह

HRA प्राप्त: 12,000 रुपये प्रति माह

किराया: 15,000 रुपये प्रति माह


HRA छूट की गणना:

1. वास्तविक HRA: 12,000 रुपये प्रति माह (1,44,000 रुपये प्रति वर्ष)



2. वेतन का 50%: (30,000 + 5,000) का 50% = 17,500 रुपये प्रति माह (2,10,000 रुपये प्रति वर्ष)



3. किराए में से वेतन का 10% घटाने के बाद: 15,000 - 3,500 (35,000 का 10%) = 11,500 रुपये प्रति माह (1,38,000 रुपये प्रति वर्ष)




न्यूनतम राशि: इन तीनों में सबसे कम राशि 1,38,000 रुपये है, इसलिए HRA छूट के रूप में 1,38,000 रुपये कर मुक्त होंगे।

5. महत्वपूर्ण बिंदु:

यदि व्यक्ति अपने स्वयं के मकान में रह रहा है, तो उसे HRA पर कोई छूट नहीं मिलती है।

HRA छूट का दावा करने के लिए, कर्मचारी को मकान मालिक का किराया रसीद प्रस्तुत करनी होती है।

यदि वार्षिक किराया 1 लाख रुपये से अधिक है, तो मकान मालिक का पैन नंबर देना आवश्यक होता है।


निष्कर्ष:

मकान किराया भत्ता (HRA) कर छूट का एक लाभदायक साधन है, जो उन व्यक्तियों के लिए है जो किराए के मकान में रहते हैं। HRA की गणना उपरोक्त तीन मानदंडों के आधार पर की जाती है और इसका उद्देश्य करदाताओं को किराए के खर्चों पर राहत देना है।

13.
किन्हीं पाँच व्यावसायिक हानियों का उल्लेख करें जो व्यावसायिक आय से कटीती योग्य नहीं हैं।



यहाँ पाँच ऐसी व्यावसायिक हानियाँ दी गई हैं जो व्यावसायिक आय से कटौती योग्य नहीं हैं:

1. आयकर या व्यक्तिगत कर: आयकर अधिनियम के तहत, किसी व्यवसाय द्वारा दिया गया आयकर, अधिभार, या जुर्माना जैसे व्यक्तिगत कर किसी व्यवसायिक आय में कटौती योग्य नहीं होते हैं।


2. व्यक्तिगत खर्च: व्यवसाय के मालिक या प्रबंधकों के व्यक्तिगत खर्च जैसे यात्रा, मनोरंजन, या निजी उपयोग की वस्तुओं पर किया गया खर्च व्यवसाय से संबंधित नहीं माना जाता और इसलिए कटौती योग्य नहीं होता है।


3. गैर-कानूनी भुगतान: रिश्वत, अवैध भुगतान, और भ्रष्टाचार से संबंधित व्यय को भी कटौती योग्य नहीं माना जाता है। इन खर्चों को व्यवसाय के लिए उचित नहीं माना जाता है और आयकर अधिनियम के तहत इन पर छूट नहीं मिलती।


4. पूंजीगत हानि: यदि किसी संपत्ति की बिक्री या व्यवसाय के स्थायी पूंजीगत ढांचे में किसी प्रकार की हानि होती है, तो उसे व्यवसायिक आय से कटौती योग्य नहीं माना जाता है। पूंजीगत हानियाँ दीर्घकालिक निवेश से संबंधित होती हैं और सामान्यतः आयकर में कटौती योग्य नहीं होती हैं।


5. संभावित देनदारी पर प्रोविजन: अगर कोई व्यवसाय भविष्य में संभावित देनदारी के लिए प्रोविजन बनाता है, जैसे कि संभावित हानि या विवादित देनदारियां, तो इसे व्यावसायिक आय से कटौती योग्य नहीं माना जाता। यह वास्तविक हानि नहीं होती बल्कि एक अनुमानित खर्च होता है।



इन पाँच हानियों को व्यावसायिक आय से कटौती के लिए मान्य नहीं माना जाता क्योंकि ये या तो व्यक्तिगत होती हैं, अवैध होती हैं, या फिर व्यवसाय के सामान्य खर्चों में नहीं आतीं।

14.
किस परिस्थिति में एक व्यक्ति की आय दूसरे व्यक्ति की आय मानी जाती है?
कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में एक व्यक्ति की आय को दूसरे व्यक्ति की आय माना जाता है। भारत में आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ऐसी स्थितियाँ निर्धारित की गई हैं, जिन्हें क्लबिंग प्रावधान कहा जाता है। इसके तहत, किसी व्यक्ति की आय को दूसरे व्यक्ति की आय में शामिल किया जा सकता है, जब:

1. पति-पत्नी के बीच उपहार या संपत्ति हस्तांतरण:

यदि एक व्यक्ति ने अपने पति/पत्नी को बिना किसी उचित प्रतिफल के संपत्ति या उपहार दिया है और उस संपत्ति से आय अर्जित होती है, तो यह आय देने वाले व्यक्ति की मानी जाएगी।

उदाहरण: यदि पति अपनी पत्नी को मकान उपहार स्वरूप देता है और पत्नी उस मकान को किराए पर देती है, तो इस किराए की आय पति की आय मानी जाएगी।


2. नाबालिग बच्चे की आय:

नाबालिग बच्चों (18 वर्ष से कम उम्र) द्वारा अर्जित आय को माता-पिता की आय में शामिल किया जाता है।

यह आय उस माता-पिता की मानी जाती है जिसकी आय अधिक होती है।

अपवाद: यदि बच्चा विकलांग है, तो उसकी आय क्लबिंग में नहीं आती है।


3. बेटे की पत्नी या बहू को संपत्ति का हस्तांतरण:

यदि कोई व्यक्ति अपनी बहू (बेटे की पत्नी) को बिना किसी प्रतिफल के संपत्ति हस्तांतरित करता है, और उस संपत्ति से आय होती है, तो इसे हस्तांतरित करने वाले व्यक्ति की आय मानी जाएगी।


4. किसी एसोसिएशन या व्यापार में पति-पत्नी के बीच निवेश से आय:

यदि पति या पत्नी एक दूसरे के व्यवसाय या फर्म में बिना किसी उचित प्रतिफल के निवेश करते हैं, तो इससे अर्जित लाभ या आय को निवेश करने वाले की बजाय दूसरे व्यक्ति की आय माना जा सकता है।


5. धोखे या कर से बचने के लिए संपत्ति का हस्तांतरण:

यदि कोई व्यक्ति कर बचाने के उद्देश्य से अपनी संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर हस्तांतरित करता है, लेकिन उस संपत्ति पर उसका वास्तविक नियंत्रण है, तो उस संपत्ति से होने वाली आय को पहले व्यक्ति की आय माना जाएगा।


निष्कर्ष:

इन क्लबिंग प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य कर बचाने के लिए संपत्ति या आय को दूसरों के नाम पर हस्तांतरित करने से रोकना है। इन नियमों के तहत, आयकर विभाग सुनिश्चित करता है कि आय का सही तरीके से आकलन हो और टैक्स चोरी न हो सके।
Note:
Ye sabhi answer chat gpt or ai ka use karke likha gya hai 

Ind vs eng T20 2 wicket jeeta india


India vs England 2wicket se jeeta hai,harahua match 

eGroup d 

         India vs England T20 match today playing 11, live score 

Live match update 


1st T20 match match jitne ke baad team India iss series me aage hai 

Or ab 2-0 se aage hai 

2 wicket se ye match bhi Jeet Gaya hai,

Ye match bhi jitne chahenge 

Abhishek Sharma ek bar fir atteking cricket khelne ki koshish karna karenge 


Neeraj chopra 

Ko shadi ki shubhkamnaye 



English team ki or se sirf 

Bowlers me jofra aarchar 

Or batter me jos butter ne khel dikhaya isliye 

Match me koi jaan nahi tha 

Per aaj jitne RCB wale England ke players hai vo achha performance karna chahenge 


ENG ne diya 165 ranon ka target 

England ka score 165/9  (20) over 


Ind ka score 

10.over 79/5

Per IND ne ye run bhi chase kar diya.

Sanju or abhishek saste out ho gaye hai 

Batanewala 

बुधवार, 22 जनवरी 2025

ग्रुप डी का फॉर्म भरा है तो ये देख लो

hello bhai

ग्रुप डी का फॉर्म भरा है तो ये देख लो

group d

अंतिम समाचार परीक्षा पुष्टि 18 सितंबर तक पता चल जाएगा

आज आपको यह पोस्ट GROUP D के लिए कोन कोन से महत्वपूर्ण दस्तावेज चाहिए, या, फॉर्म फॉर्म भरने के लिए कोन कोन से महत्वपूर्ण बातें है आप जानोगे
(ग्रुप डी का फॉर्म भरने से पहले जरूर देख लो)

Group D ke important document 



Abki bar group D par
1.ग्रुप डी की कितनी वैकेंसी आई है 
इस बार 2025 का नोटिफिकेशन जारी करेंकुल 32,438 वैकेंसी आई है.
पर काई लोग कह रहे हैं कि ये नंबर या ज्यादा हो सकता है।

2 ग्रुप डी के लिए आवेदन कर सकते हैं

ग्रुप डी के लिए जो सिर्फ 10वीं पास है वो भी भर सकता है या जिसने आईटीआई किया है वो भी,

3.क्या क्या दस्तावेज़ चाहिए फॉर्म भरने के लिए

  1. 10वीं का प्रमाणपत्र, आईटीआई प्रमाणपत्र
  2. पासवर्ड साइज़ फ़ोटो (50kb)
  3. जाति प्रमाणपत्र अगर आवेदन करना हो
  4. कोई कानूनी पहचान प्रमाण, आधार, पासपोर्ट, पैन कार्ड
  5. या मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी
 अगर आपके पास कोई या सर्टिफिकेट है जिसका आपको लाभ मिल सकता है तो आप जरूर करें, जैसे, PWD - दिव्यांग वाले, विकलांगता, EWS आदि।

4 .पिछली बार परीक्षा का कटऑफ क्या था

न्यूनतम योग्यता अंक:

सामान्य और EWS उम्मीदवारों के लिए: 40%

OBC और SC उम्मीदवारों के लिए: 30%

ST उम्मीदवारों के लिए: 25% 

ये न्यूनतम प्रतिशत है, लेकिन अलग अलग जॉन, का कटऑफ अलग अलग था।
जैसे CHANNAI ka पिछली बार कटऑफ/

General.         94.6

           OBC.               90.84

           SC.                   86.46

            ST.                   81.4

         EWS.                  77.91

EWS - economically poor people.


5. न्यूनतम वेतन कितनी होगी

18000-25000 के आसपास in hand💲💰🏧

6.फॉर्म भरने की अंतिम तिथि

22 February 2025 hai 

अधिक जानकारी के लिए

Link number 1

Link number 2

मुझे आशा है कि ये जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी, कृपया मेरा समर्थन करें

Ind vs england T20 2nd match 2025



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Affiliate marketing kya hota hai,

Manu bhakar

शनिवार, 3 अगस्त 2024

मनु भाकर ने 1 ही ओलंपिक में 2 पदक जीते

मनु भाकर ने 1 ही ओलंपिक में 2 पदक जीते

Anu bhaker
Manu bhaker proud of you 

इसी बीच उन्हें पूरे देश भर से बधाइयां आ रही हैं 

पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति मुर्मू ने भी ट्वीट किया है। watch on flipkart new offer

जहां सभी बाकी भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा वही मनु भाकर भारत के उम्मीद की किरण राही है।

manu bhaker ने ही भारत को 2 पदक दिलाये हैं।


Main point 

  • Manu bhaker Instagram 
  • Manu bhaker 1 st madal
  • Manu bhaker age
  • टॉप भारतीय जिन्हों भारत के लिए सबसे ज्यादा मेडल जीते हैं


Manu bhaker Instagram id 

- bhakermanu

ओलंपिक के इतिहास में भारत के लिए जो आज तक कोई नहीं कर सका, वह आज मनु भाकर ने कर dikhaya ।मनु ने शुक्रवार को निशानेबाजी में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में फाइनल में जगह बनाई जिसे उनके पास शनिवार के ओलंपिक पलकों की हैट्रिक लगाने का सुनहरा अवसर tha ,per manu 4th sthan per ho finish kar payi,

आज तक कोई भी भारतीय खिलाड़ी तीन ओलिंपिक पदक नहीं जीत सका है अगर मनु ओलिंपिक की जीत लेती है तो एक ही ओलिंपिक में तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन जाएंगे per aisa nahi ho paya  हरियाणा की इस निशानेबाज ने इसे पहले पेरिस में 10 मीटर एयर पिस्टन प्रतिस्पर्धा और 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड 2 में Bronze 🥉 पदक जीत kar इतिहास रचा था| वाह पहलवान सुशील कुमार और पीवी सिंधु के baad दो ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की तीसरी खिलाड़ी ban jgayi hai 

 हालांकी सुशील और सिंधु ने जहां उपलब्धि दो अलग-अलग वर्षों में हासिल की थी वहां मनु भाकर ने यह उपलब्धि सिर्फ एक ही ओलंपिक में हासिल की है।

साथ ही मनुभाकर 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पहुंचि वह एक ओलिंपिक के तीन फाइनल में पहुंचने वाली pahli Indian athletes hai,

पहली भारतीय एथलीट हैं

मनु भाकर का जन्म 18 फरवरी 2002 को हरियाणा के झज्जर में हुआ यह राज्य अपने मुक्केबाजों और पहलवानों के लिए जाना जाता है हालांकी manu ne स्कूल में ट्रेनिंग स्केटिंग मुक्केबाजी jaise  खेल में भाग लिया और तंग थाने naam ke ek  में मार्शल आर्ट में भाग लिया जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्टार प्रति पदक जीते

हालांकी हालांकी मनु भाकर अभी ओलिंपिक खेल रही है पर देखने में इतनी सुंदर है कि उसके सामने बड़े-बड़े बॉलीवुड कलाकार भी फेल हैं|

Manu khaker से पहले ओलिंपिक पदक जीते जबकी पहलवान सुशील और बैडमिंटन star खिलाड़ी पीवी सिंधु ने के नाम एक-एक रजत और एक Bronze 🥉  पदक है मनु भाकर ने 28 जुलाई को महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टन प्रतियोगिता में अपना पहला Bronze पदक और 30 जुलाई को 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित तीन प्रदान में दूसरा पदक जीता है|

नॉर्मन प्रिचर्ड    उन्होंने भी 1900 में 2 मेडल जीते थे पर ve एक ब्रिटिश इंडियन थे,

भारत का सर्वश्रेष्ठ ओलंपिक टोक्यो ओलंपिक 2020 था जिसमें भारत ने 7 पदक जीते थे, या नीरज चोपड़ा का वो स्वर्ण पदक वही आया था।

अब मनु भाकर एक नेशनल क्रश बन चुकी है।


वैसे मनु भाकर एक बहुत ही सुलझी हुई है, क्योंकि वो भागवत गीता भी पढ़ती है, सिलाई भी आती है, उनको देश को पदक भी दिलाए है, या बहुत से खेलों में राज्य स्तर पर पदक जीत चुकी है तो आप मनु भाकर को जो चाहे तारीफ कर सकते हैं,

Manu bhaker records
Sports club classic,manu bhaker 
 

गुरुवार, 1 अगस्त 2024

Bharat ने जीता तीसरा मेडल , Olympic 2024, neeraj chopra, manu, swapnil kusale

Bharat ने जीता तीसरा मेडल , Olympic 2024, neeraj chopra, manu, swapnil kusale 


पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने 2 पदक जीते हैं,  कोन-कोन से पदक जीते हैं, या भारत कितने स्थान पर है। भारत की ओर से पेरिस ओलंपिक में पहला पदक जीतने वाली मनु कोन है, अभी तक भारत में कितने पदक जीते हैं। 26 जुलाई से 11 अगस्त तक चलने वाली इस पेरिस ओलंपिक 2024 का सारा अपडेट आपको मिलेगा। आप ओलिंपिक गेम्स से जुरे बहुत कुछ जानेंगे।पेरिस ओलंपिक में कुल 206 देशो ने हिसा लिया है .



इस ओलंपिक में पहला पदक 🥇 चीन के नाम रहा |

भारत के लिए पहला मेडल हरियाणा की बेटी मनु भाकर ने जीता।

Jane Bharat kitne stan per hai, Paris Olympic 2024 


paris olympic 2024 points table in hindi

पेरिस ओलंपिक पदक तालिका 2024

पेरिस ओलंपिक 2024 अंक तालिका हिंदी में

(Note:31 july 2024 10:10pm)

Country       Total.     Gold.     Silver.    Bronze 


1.china         21.           11         7.             3

2.france         26            8.         10           8

3.japan.         15.            8.           3           4

4.Australia       17          7.           6            4

38.  INDIA.         3         -           -            3


Paris Olympic 2024 letest update in hindi 

भारत ने किन-किन खेलों में पदक जीते हैं 

खिलाड़ी.                    खेल.                            पदक
(Player )               (Games)                 ( Medals )
  Manu                10 m Air               Bronze🥉 
  Bhaker               pistol    
Sabarjot.                  "                       Bronze🥉 
 Singh +manu

     मनु भाकर कोन है?

मनु भाकर (जन्म: 18 फ़रवरी 2002) ने पेरिस ओलंपिक 2024 की 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीता है. 2018 के आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में उन्होंने भारत के लिए दो स्वर्ण पदक जीते. इस प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली वे भारत की सबसे कम उम्र की महिला हैं. मनु ने महज 16 साल की उम्र में 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में एयर पिस्टल स्पर्धा में दो स्वर्ण जीते हैं.
मनु भाकर
(व्यक्तिगत जानकारी)
जन्म
18 फ़रवरी 2002 (आयु 22)
झज्जर, हरियाणा, भारत
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नीरज चोपड़ा कब खेलेंगे?

नीरज चोपड़ा पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में भाग लेंगे, जिसके क्वालीफायर 6 अगस्त को होंगे और फाइनल दो दिन बाद होगा। वह इस स्पर्धा के गत विजेता हैं


भारत ने पिछले ओलंपिक में कितने पदक जीते थे?
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भारत ने पिछले ओलंपिक में यानी कि टोक्यो ओलंपिक 2020 में कुल 7 पदक जीते थे, 1 स्वर्ण 2 रजत, 4 कांस्य कुल 7 जिसमें से 1 स्वर्ण पदक 🏅नीरज चोपड़ा ने दिलाया था.
Jane Bharat kitne stan per hai, Paris Olympic 2024 
अगला ओलंपिक कहां होगा ?

Los Angeles (America) 2028 
अगला ओलिंपिक अमेरिका के लॉस एंजिल्स में 2028 में खेला जाएगा, और हर 4 साल बाद खेला जाता है

Paris Olympic 2024 letest update  in hindi 
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Swapnil kusale kon hai 

स्वप्निल कुसाले एक भारतीय खेल निशानेबाज हैं जो 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में प्रतिस्पर्धा करते हैं। उन्होंने 2024 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। 

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के कितने खिलाड़ी ने भाग लिया है?

ओलंपिक 2024 में भारत के कुल 117 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।
पेरिस 2024 ओलंपिक में, 16 स्पोर्ट्स डिसिप्लिन में 117 एथलीट भारतीय दल में शामिल हैं, जिनमें 70 पुरुष और 47 महिलाएं शामिल हैं। वे 95 पदकों के लिए 69 स्पर्धाओं में प्रतिस्पर्धा करेंगे।

44 साल के टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना पेरिस 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे उम्रदराज एथलीट हैं, जबकि 14 साल के तैराक धीनिधि देसिंधु सबसे कम उम्र की प्रतियोगी हैं।
भारतीय निशानेबाजों ने पहली बार प्रत्येक ओलंपिक शूटिंग वर्ग में कोटा हासिल किया है।

किस राज्य से सबसे ज्यादा खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक 2024 में गए है?
राज्य

हरियाणा के सबसे ज्यादा एथलीट्स पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व करते दिखेंगे। इस राज्य के 24 एथलीट पेरिस में देश का प्रतिनिधित्व करते दिखेंगे।  19 एथलीटों के साथ पंजाब दूसरे नंबर पर है।

राज्य.                       खिलाड़ी संख्या
Hariyana.                         24
Panjab.                              19
Tamilnadu                        13
Karnataka                         7
Uttar Pradesh                   7

गोल्ड मेडल में कितना सोना होता है? 

गोल्‍ड मेडल में होता 6 ग्राम सोना hota hai,
स्‍वर्ण पदक का वजन करीब आधा किलो (556 ग्राम) होता है। वहीं रजत पदक की बात करें तो यह पूरी तरह सिल्‍वर का बना होता है। इसका वजन भी आधा किलो  करीब होता है।


भारत में ओलंपिक गेम्स कब होगा?

भारत में ओलंपिक कब होगा इसको लेकर अभी कोई कन्फर्म अपडेट नहीं है, हालांकी भारत सरकार की कोशिश है कि 2036 ओलंपिक भारत के अहमदाबाद में कराया जाए।  लेकिन इस बात पर अभी कोई अधिकारिक घोषना नहीं हुई है

भारत सरकार अमदाबाद में तैयारी कर रही है ताकि सारी सुविधाएं उपलब्ध हो सके या हम यह दावा कर सकें कि अब हम ओलंपिक की मेजबानी करने के लिए तैयार हैं
पेरिस ओलंपिक 2024 अंक तालिका हिंदी में

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Ind vs sl: harshit Rana debut,full details ,ODI

Ind vs sl: हर्षित राणा का हो सकता है डेब्यू, 
भारतीय टीम पहली बार जगह बनाने वाले हर्षित राणा, जो कि आईपीएल 2024 में काफी चर्चा में रहे और 1 मैच में बैन  भी हूए. वो अपनी शानदार परफॉर्मेंस की बदौलत टीम इंडिया  मेरा डेब्यू करने वाले हैं।
इस वनडे सीरीज के लिए विराट कोहली या रोहित शर्मा भी आ चुके हैं श्रीलंका।
Harshit Rana debut IND vs Srilanka 



 भारत बनाम श्रीलंका: पहला वनडे हर्षित राणा का डेब्यू मैच हो सकता है, भारत बनाम श्रीलंका की वनडे टीम में बुम्ब्रा भी नहीं और हार्दिक भी नहीं तो 2 तेज गेंदबाज  सिराज और अर्शदीप है ,3rd तेज गेंदबाज कोई नहीं है तो आप 99% Maan  लो  हर्षित राणा का डेब्यू होगा ही।

 हर्षित राणा ne बीते साल आईपीएल में अपनी टीम केकेआर को चैंपियन बनाने में अहम योगदान निभाया, उसी के baad उन्हें टीम में चुना गया है।
 और आईपीएल के फाइनल में भी शानदार परफॉर्मेंस दी।

गौतम गंभीर केकेआर के (mentor)गुरु, वे अब टीम इंडिया के मुख्य कोच हैं।और एक दूसरे अच्छे से जानता भी है।


 मुख्य बातें 

  • हर्षित राणा कोन है  ?
  • हर्षित राणा आईपीएल 2024
  • क्या हर्षित all rounder है ?
  •  हर्षित राणा को आईपीएल में क्यों बैन किया था।
  •  क्या हर्षित राणा (आईपीएल) IPL 2025 RCB (आरसीबी )में जाएंगे?
  •  हर्षित राणा, नितीश राणा के भाई हैं?


 हर्षित राणा कौन है? 

हर्षित राणा का पूरा नाम- हर्षित प्रदीप राणा है, इनका जन्म 22 दिसंबर 2001 नई दिल्ली में हुआ था।

 हर्षित राणा एक मध्यम तेज गेंदबाज हैं या वो केकेआर को और से खेलते हैं,  पहले दिल्ली की टीम में शामिल करें, पर उनका आईपीएल डेब्यू केकेआर की और से अप्रैल 2022 में हुआ, हर्षित राणा का आईपीएल 2024 बहुत ही चर्चा में रहा हर्षित राणा से ज्यादा चर्चा  तो उनके विकेट लेने के बाद के रिएक्शन पर हुआ था वो रिएक्शन भी आपको आगे बताएंगे, टी20 करियर हर्षित राणा    

 मैच.               विकेट,             औसत.   
 25.               25.                   23.64

हर्षित राणा आईपीएल 2024 फाइनल प्रदर्शन

Over     wickets    maidan          eco.   .  Run 

     4             2.             1.               6.           24
Harshit Rana IPL 2024 final performance 

हर्षित राणा प्रथम श्रेणी (First class)करियर

मैच.      7                    
                                
रन.        343

विकेट.      28

बल्लेबाजी औसत.    49.0

शीर्ष स्कोर.      122*

100/50.          1 /1

Best bowling.   7/45 

क्या हर्षित राणा औलरॉन्डर है? 
हर्षित राणा एक मध्यम तेज गेंदबाजी all rounder (ऑलराओन्डर ) है। Or  बैटिंग भी कर सकता है या बड़ी हिट्स भी लगा सकता है आप उनके ये रिकॉर्ड देख सकते हैं बैटिंग की, हलाकि आईपीएल में उनकी बैटिंग नहीं आई इसलिए उनकी बैटिंग के बारे में ज्यादा बात नहीं होती।

 हर्षित राणा ने फर्स्ट क्लास करियर में 1 सेंचुरी भी लगा ली है ये रिकॉर्ड्स देख कर तो आप समझ ही गए होंगे कि हर्षित राणा का डेब्यू क्यों हो सकता है।

 हर्षित राणा को आईपीएल में क्यों बैन किया था।




 हर्षित राणा ने आईपीएल 2024 में एक मैच के लिए बैन कर दिया था या एक मैच में उन्हें( 60%match fees) से ऊपर का जुर्मना भी लगया था, KKR vs SRH का आईपीएल 2024 का ये मैच जिसमें हर्षित राणा ने मयंक अग्रवाल को आउट करने के बादFlying kiss( उड़ान भरी  किस) देते हुए अपने विकेट का सेलिब्रेशन किया और ये वायरल हो गया, इसी फ्लाइंग किस के कारण उनपे जुर्मना भी लग गया और वार्निंग भी दी गई पर हर्षित राणा कहां manne  वाले वे kkr vs Dc (केकेआर बनाम दिल्ली )के मैच में उनके विकेट लेने के बाद वो वही प्रतिक्रिया को  दोहरा बैठे हालांकी उनको पूरा रिएक्शन नहीं किया 60. % के बाद रुक गए पर वो रिएक्शन वही जो अन्होने मयंक अग्रवाल को  किया था.



 इसके बाद ये रिएक्शन रोहित शर्मा ने भी मैच प्रैक्टिस के दौरान मयंक के मजे लेते किया था और ये फोटो भी काफी वायरल हुआ था।


 क्या हर्षित राणा आईपीएल 2025 RCB (आरसीबी) में जाएंगे?

 एक इंटरव्यू के दौरान हर्षित राणा से पूछा गया था कि आपकी पसंदीदा टीम कौन सी है, किस टीम से खेलना चाहेंगे।  
उनको तो कहा था my fevrate team is KKR or अगर केकेआर उन्हें रिटेन नहीं करती है तो उनकी दूसरी टीम RCB आरसीबी होगी .

हर्षित राणा का डेब्यू IND बनाम श्रीलंका 

या फिर आपने भी कहा था कि मेरा सपना है भारतीय टीम से खेलना।

हर्षित राणा, नितीश राणा के भाई हैं?
Harshit राणा, नीतीश के साथ कोई रिश्ता नहीं है, हलांकि एक समान उपनाम होने के कारण ऐसा लगता है और
 दोनों एक ही टीम से खेलते हैं।
और फिर ये भी कहा जाता है कि नीतीश राणा ने hi अभिषेक नायर से कहा था कि हर्षित अच्छा खेलता है इसे टीम में ले लो।

बुधवार, 31 जुलाई 2024

शीर्ष 5 रिकॉर्ड, भारत बनाम श्रीलंका, वनडे में जो असंभव है

शीर्ष 5 रिकॉर्ड, भारत बनाम श्रीलंका, वनडे में जो असंभव है

Top 5 records in ind vs srilanka 

भारत बनाम श्रीलंका वनडे में शीर्ष 5 रिकॉर्ड


क्या यह पोस्ट आप जानोगे कि भारत या श्रीलंका के बीच हुए अभी तक के टॉप 5 रिकॉर्ड्स से मेल खाता है क्या है?

अगर आप टीम इंडिया से अपडेट सबसे पहले जानना चाहते हैं तो फॉलो करें,

टॉप 5 बैटर जिन्होनें सबसे ज्यादा रन बनाया है, भारत या श्रीलंका के 

कोन कोन से गेंदबाजों ने रिकॉर्ड विकेट लिए हैं।

टीम इंडिया के बारे में तो आप जानते ही हैं, जहां क्रिकेट की बात होगी वहां इंडिया का नाम आएगा ही।

चाहे बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी, कप्तान, सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज (बल्लेबाज) शीर्ष रन स्कोरर।

आप किसी भी फॉर्मेट को ले लो टी20, वनडे या टेस्ट 

टीम इंडिया के बिना क्रिकेट कोई सोच नहीं सकता, तभी तो दुनिया में जितना क्रिकेट को देखा जाता है, उससे ज्यादा तो सिर्फ इंडिया में क्रिकेट को देखा जाता है।

यहां क्रिकेट को एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है 

भारत बनाम श्रीलंका वनडे में 5 ऐसे रिकॉर्ड जो शायद ही टूटेगा।

ये रिकॉर्ड्स शायद ही कोई तोड़ पाएगा,

शीर्ष 5 रिकॉर्ड, भारत बनाम श्रीलंका, वनडे में जो असंभव है

  1. भारत बनाम श्रीलंका, शीर्ष 5 रन बनाने वाले खिलाड़ी
  2. विकेट लेने वाले शीर्ष 5 गेंदबाज़
  3. सबसे ज़्यादा शतक
  4. किसने कितने मैच जीते हैं
  5. पिछले 3 मैचों के नतीजे
  6. दोनों टीमों की मौजूदा वनडे टीमें
  7. एक मैच में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी

Top 5 records in ODI IND vs Sri Lanka

शीर्ष 5 रिकॉर्ड, भारत बनाम श्रीलंका, वनडे में जो असंभव है


  • भारत बनाम श्रीलंका शीर्ष 5 रन स्कोरर


Name.              Runs.        Highest.    Average


Sachin              3113.          138.            43.84

Tendulkar 

Virat Kohli.        2594*.        166*.          63.56

M S dhoni.        2383.          183*.          64.40

Inzamam.         2265.           118*.          44.41

Ul-hak 

Saeid anvar.     2198.           126.           44.85

आप किसके फैन हैं मुझे कमेंट करके बताएं?

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  • विकेट लेने वाले शीर्ष 5 गेंदबाज

Name                          wicket.      Best.       Eco.

 M.muralidharan         74.      7/30.          4.28

WPUJC vaas (SL).         70.         5/14.        4.66

Zahir khan. (Ind).          60.        5/42.          4.98

Harbhajan Singh (ind)61.          5/56.         4.19

Ajit aagarkar (ind).      49.          5/44.         4.98


Name                centuries 


Virat Kohli.              10*

Sachin.                        8

Tendulkar

Jayasuriya.                 7

Rohit Sharma.            6*

Goutam 

gambhir                       6

Sangakara.                  6

  • किसने कितने मैच जीते हैं

Matches       India.     Srilanka.      no-result 

168.                   99.              57.                    11

  • Last 3 matches results 


शीर्ष 5 रिकॉर्ड, भारत बनाम श्रीलंका, वनडे में जो असंभव है
  • दोनों टीमों की वर्तमान एकदिवसीय टीमें

INDIA 

Rohit Sharma (C), Shubman Gill (vc), Virat Kohli, KL Rahul (wk), Rishabh Pant (wk), Shreyas Iyer, Shivam Dube, Kuldeep Yadav, Mohammed Siraj, Washington Sundar, Arshdeep Singh, Riyan Parag, Axar Patel, Khaleel Ahmed, Harshit Rana.

SRILANKA

 

Charith Asalanka (C), Pathum Nissanka, Kusal Janith Perera, Avishka Fernando, Kusal Mendis, Dinesh Chandimal, Kamindu Mendis, Dasun Shanaka, Wanindu Hasaranga, Dunith Wellalage, Maheesh Theekshana, Chamindu Wickramasinghe, Matheesha Pathirana, Dilshan Madushanka, Asitha Fernando, Binura Fernando.

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  • एक मैच में सर्वाधिक रन

भारत 414/7 राजकोट, 15 दिसंबर

2009.

श्रीलंका 411/8 भारत बनाम श्रीलंका

  • एक मैच का सबसे कम स्कोर

श्रीलंका 50/10 17 सितंबर 2023 कोलंबो।

  • Rohit Sharma is highest run score as a player 

एक पारी में 264 रन

33 चौके, 9 छक्के

भारत बनाम श्रीलंका एडन गार्डन, कोलकाता, 13 नवंबर 2014

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भारत बनाम श्रीलंका वनडे में शीर्ष 5 रिकॉर्ड 
भारत बनाम श्रीलंका वनडे में 5 ऐसे रिकॉर्ड जो शायद ही टूटेगा
आपको क्या लगता है इस सीरीज में ज्यादा रन बनाएंगे?
कृपया मुझे कमेंट करें, या कोन प्लेयर ये रिकॉर्ड्स तोड़ सकते हैं।
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भारत बनाम श्रीलंका में 5 ऐसे रिकॉर्ड जो शायद ही टूटेगा
आपको क्या लगता है इस सीरीज में रन बनाने वाले खिलाड़ी 
कृपया मुझे टिप्पणी करें, या कोई भी खिलाड़ी इन रिकॉर्ड्स को तोड़ सकता है। 

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